ज्यादा सोचना कैसे बंद करें ? 5 आसान तरीके से ज्यादा सोचना बंद होगा ? – How to Stop Overthinking

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आज अधिकतर मनुष्य Overthinking का शिकार हैं और इसका प्रभाव आपके जीवन पर अलग अलग तरीके से पड़ता है जैसे आप में से काफी व्यक्तियों के साथ में ऐसा होता होगा कि रात को सोने के लिए तो जाते हैं लेकिन नींद नहीं आती। 

आप प्रयास तो करते हो सोने का लेकिन इधर उधर के विचार आते ही रहते हैं आपका मन तो होता है कि आप सो जाओ लेकिन दिमाग और ही दूसरे विचारों में खोया रहता है।

आप खूब प्रयास पे प्रयास करते हो लेकिन नींद आती ही नहीं है ऐसा आज लगभग युवाओं के साथ में होता ही है।

मित्रो आज हम इस समस्या के कारण और उपाए दोनों को जानेगे और ज्यादा सोचने की समस्या को जड से खतम करेंगे

 बहुत ज्यादा सोचना क्या है? (Bahut Jyada sochna kya hota hai)

ज्यादातर व्यक्तियों का जो मन होता है वह बंदर की तरह होता है अभी एक पल यहां है तो दूसरे पल कहीं होगा यदि आपको लगता है कि आपका दिमाग बंदर की तरह नहीं है बंदर की तरह हरकतें नहीं करता है तो आप कुछ देर आंखें बंद करके किसी एक विषय पर चिंतन या ध्यान लगा कर तो देखिए आप पाएंगे कि आप कुछ और करने बैठे थे लेकिन आप कभी भूतकाल में पहुंच गए कभी भविष्य पहुंच गए।

आपके दिमाग में कभी कुछ विचार आएंगे कभी कुछ विचार आएंगे और यह चीज आपकी ऊर्जा को खाती है आपकी ताकत को नष्ट करती है। भुत भविष्य के बारे में अत्यधिक सोचना ही ज्यादा सोचने की बिमारी है।

ज्यादा सोचने का कारण क्या है? (Jyada sochne ka karan) 

आइए सबसे पहले हम उन दो कारणों को जान लेते हैं जिसके कारण ओवर थिंकिंग व्यक्ति करता है यानी ज्यादा सोचने का कारण क्या है? ये जानते हैं। 

ज्यादा सोचने के 2 कारण है।

  • 1 भूत
  • 2 भविष्य

भूत और भविष्य इन 2 कालों में घूमते रहने के कारण व्यक्ति नकारात्मक विचारों से भरा रहता है उत्साहहीन हो जाता है चिंता तनाव अनिद्रा असफलता निराशा आदि  उसको घेर लेते हैं। 

  1. सबसे पहले हम बात करते हैं भूतकाल के बारे में यानी भूत के बारे में उदाहरण से समझिये।

मान लीजिए भूतकाल में आपको किसी ने पीट दिया था और अब आपके दिल में वह बात लगी हुई है कि उस व्यक्ति ने मुझे तब पीटा था अगर अबकी बार मुझसे वो लड़ेगा तो मैं उसको अच्छे से पिटूँगा और उसे अच्छे से मजा चखा दूंगा और इसी उधेड़बुन में आपकी रातों की नींद भी उड जाती है। 

क्योंकि आपने भूतकाल में हुई उस घटना को काफी मजबूती से पकड़ा हुआ है आप उस घटना को भूल ही नहीं पा रहे हैं। 

एक महान क्रांतिकारी हुए है ब्रह्मचारी रामप्रसाद बिस्मिल जी एक बार नदी के किनारे ध्यान कर रहे थे तो उनके ऊपर उनके मित्र ने गोली चला दी बिस्मिल जी को गोली नहीं लगी और वो वहां से बच कर निकल आए इसके बाद उनके मन में बदला लेने की भावना जागी और इसी कारण उन्हें बुखार आया जो उतरने का नाम ही नहीं लेता था बिस्मिल जी ने वो घटना अपनी माँ को बताई मा ने बोला की उसे शमा करदे तू ठीक हो जायेगा बिस्मिल जी ने उसे शमा कर दिया और बिस्मिल जी ठीक हो गए। इस सत्य घटना से हमें समझ में आता है की अत्यधिक क्रोध में सोचते रहना हमारा विनाश करता है। 

  1. अब हम बात करते हैं दूसरे कारण पर यह है भविष्य का कारण।

सोनू के माता पिता सोनू को बचपन से यह बात बोलते आए थे कि बेटा तुझे बड़ा होकर डॉक्टर बनना है सोनू के दिमाग में डाक्टर बन्ने का बोझ जनम से ही डाल दिया गया 

लेकिन जब सोनू बड़ा होने लगा तो उसकी रूचि चित्रकारी में बढ़ती चली गई उसे जानवरों के मनुष्यों के चित्र बनाना बड़ा ही अच्छा भाता था सोनू इसीमे अपना भविष्य बनाना चाहता था। 

परन्तु माता-पिता यही बोलते थे कि तुझे डॉक्टर बनना है और यदि तेरे कम नंबर आए तो हम तेरी पिटाई करेंगे या तुझे तेरी मनपसंद चीज नहीं देंगे इस तरीके से उसको तनाव में रखने का प्रयास करते थे।

अब सोनू थोड़ा बड़ा हुआ थोड़ा सोचने समझने के लायक हुआ अब वह सोचने लगा कि मैं क्या करूं मेरी तो रुचि नहीं है कि मैं मेडिकल की किताबें पढूं मेरी रुचि तो स्केचिंग में है चित्र बनाने में है एक स्केचिंग आर्टिस्ट बनने में है और वह इसी उधेड़बुन में लगा रहता उसको रात को नींद भी आनी बंद हो गई अब वह नींद लाने के लिए नींद की गोलियां खाने लगा जिससे उसके शरीर पर नकारात्मक असर पड़ा और उसका शरीर काफी ज्यादा कमजोर हो गया। 

ऐसा सोनू के साथ क्यों हुआ ऐसा सोनू के साथ इसलिए हुआ क्योंकि उसके माता-पिता उस पर अपनी इच्छाओं को डाल रहे थे अपने बेटे की गुणवत्ता को ना पहचान कर जो किसी और की गुणवता है वह अपने बेटे पर जबरदस्ती डालने का प्रयास कर रहे थे इसके कारण सोनू का स्वास्थ्य बिगड़ा ओवरथिंकिंग में वह लगा रहा नकारात्मक विचारों में लगा रहा और उसका शरीर बहुत ही ज्यादा कमजोर हो गया।

अब हमने उन कारणों को जान लिया है जिनके कारण ओवरथिंकिंग की समस्या हो जाती है अब हम इन कारणों को हटाने के लिए क्या कर सकते हैं वह जानते हैं। 

ज्यादा सोचना कैसे बंद करें ?

सबसे पहले मैं आपको यह बता देना चाहता हूं कि इस दुनिया में कुछ भी स्थाई नहीं है आप अपने आसपास होती घटनाओं को देखते हैं आप अपने शरीर को देखते हैं वनस्पतियों पेड़-पौधों आदि को देखते हैं तो कुछ भी स्थाई नहीं है सभी में परिवर्तन आ रहा है तो आपकी परिस्थितियों में भी परिवर्तन आएगा यदि आप वर्तमान में रहकर पुरुषार्थ करते रहेंगे तो आप जरुर सफल होंगे

ज्यादा सोचना कैसे बंद करें   How to Stop Overthinking

पहला उपाय सांसों को हल्का करना सीखो 

अब आप सोच रहे होंगे भाई यह सांसो को हल्का करना क्या है? जब आप अपनी सांसों को पकड़ना सीख जाएंगे तो आप जान जाएंगे कि जब भी आप ओवरथिंकिंग करते हैं यानी ज्यादा सोचते हैं जब भी आप क्रोध करते हैं जब भी आप लोग लालच में फंसते हैं तो आपकी सांसों की जो सामान्य अवस्था है वह बिगड जाती है वो अपने सवभाव से कुछ तेज हो जाती है  और बहुत तेज भी हो जाती है दिल की धड़कन भी बढ़ जाती है और आपकी ऊर्जा काफी ज्यादा नष्ट होती जाती है।

सांसो को हल्का करने के लिए सांसो का अभ्यास एसे करें

आपको यह अभ्यास सुबह और शाम दोनों समय करना है केवल 30 मिनट का ये अभ्यास है। 

30 मिनट आपका जीवन बदलने के लिए मील का पत्थर साबित होंगे सुबह शाम के समय का चयन आप अपनी सुविधा अनुसार ही करें मैं यहां आपको कोई समय नहीं बताऊंगा क्योंकि आप अपने निजी जीवन के विषय में अच्छे से जानते हैं और अपने लिए समय खुद निकाल सकते हैं।

शांति से कमर गर्दन सीधी कर कर बैठ जाएं बैठ नहीं सकते तो लेट जाएं लेकिन सीधा लेटना है अब आप लंबी गहरी सांस लें नाक से सांस लें तो मन की आँखों से पेट को फूलता हुआ महसूस करें और जब छोड़े तो पेट अंदर जा रहा है लेकिन जब पेट अंदर जाता है तो उसको जबरदस्ती आपको खुद से अंदर भिचने का प्रयास नहीं करना है बस पेट से हवा निकल गई और पेट अंदर चला गया इसी प्रकार अपने मन को कुछ देर पेट के बाहर जाने पर सांसो के साथ पेट के अंदर आने पर सांसो के साथ लगाकर रखें।

धीरे-धीरे यह क्रिया स्वाभाविक होती जाएगी यानी आप यंत्र की भांति इस क्रिया को नहीं करेंगे लेकिन कुछ समय आपको अपने आपको देना होगा उसके बाद आप देखेंगे आपकी सांसे हल्की से हल्की होती जाती है और मन भी शांत होता जाता है।

सांसो पर ध्यान कैसे लगाए विडियो देखिये

ध्यान रखे ये बात

आपको एक बात का ध्यान रखना है जब आप इस प्रकार से सांस के साथ पेट पर अपना मन लगाएंगे तो आपको भूतकाल के और भविष्य के विचार आएंगे जैसा कि मैं ऊपर दो कारणों में आपको बता चुका हूं। अब आपको उन कारणों के साथ में फसना नहीं है। 

वह कारण आपको फसाने आएंगे परंतु आपको उनके साथ में कोई युद्ध नहीं लड़ना है आपको केवल अपने पेट और सांसो के प्रति जो क्रिया आप कर रहे थे बस उसके प्रति सजग हो जाना है बार-बार वही दो कारण आपको आकर परेशान करेंगे परन्तु  आपको उनके साथ युद्ध नहीं करना है और पेट और सांसो की इस मिली-जुली क्रिया के प्रति जागरूक रहना है।

कुछ दिन लगातार अभ्यास करने के बाद आप पाएंगे कि अब वह विचार वह भूतकाल और भविष्य का जो विचार आता था वह अब कुछ कुछ देर से आने लगे हैं वह कम होते जाएंगे और जो आप यह क्रिया कर रहे हैं पेट और सांसो के प्रति जागरूक रहने की यह पूरी जागरूकता के साथ बढ़ती जा रही है इस क्रिया के बीच में कोई विचार नहीं आ रहा है ऐसा अभ्यास करते करते आप उन्नति की तरफ आगे बढ़ेंगे overthinking से धीरे धीरे आपको छुटकारा मिल जायेगा। 

उपाय 2, ऐसा करने से रात को आती है बहुत अच्छी नींद  

हमारे देश में बहुत बड़े योगी सन्यासी हुए हैं जिन्हें क्रांतिकारियों का गुरु भी कहा जाता है क्रांतिकारियों का पिता भी कहा जाता है उनका नाम था ऋषि दयानंद सरस्वती जी एक बार ऋषि दयानंद से किसी ने पूछा स्वामी जी नींद नहीं आती क्या करें स्वामी जी ने बताया प्रयास करो पूरे दिन गायत्री मंत्र का जाप मन ही मन करते रहो और रात्रि को जब सोने जाओ तो ओ३म् का जाप चलता रहे। 

क्योंकि ओ३म् छोटा अक्षर है और वेदों के बताए अनुसार ईश्वर का मुख्य नाम भी ओ३म् है और ऐसा करने से आपको जल्दी नींद आ जाएगी।

इसके अभ्यास के बाद केवल नींद ही अच्छी नहीं आएगी बल्कि आपका पूरा जीवन ही बदल जाएगा जब आप सुबह उठेंगे तो आप पाएंगे कि आप उर्जा से काफी ज्यादा भर चुके हैं। 

और कुछ दिनों के अभ्यास के बाद आप पाएंगे कि आप जब ओ३म् का जाप शुरू करते हैं उसके बाद आपको नींद तो आ जाती है परंतु जो आपका मन है वह उसी जाप में लगा रहता है जिसके कारण आपके शरीर में ब्रह्मांड की ऊर्जा काफी अधिक प्रवेश करती है जो आपको ऊर्जावान बनाकर रखती है।

तो दूसरा उपाय यही है कि जवाब रात को सोने जाए तो ओ३म् का जाप करें ओ३म् का जाप करते करते ही आपको नींद आ जाएगी यदि नींद नहीं आ रही है तो भी आप पहले की भांति थकावट और चिंता में नहीं रहेंगे।

उपाय नंबर 3, वर्तमान में रहना सिखो

यह लिखना और बोलना कितना आसान है कि वर्तमान में रहना सीखो यह बात उस व्यक्ति से पूछनी चाहिए जो व्यक्ति ओवरथिंकिंग का शिकार है क्या वर्तमान में रह पाता है बिल्कुल भी नहीं हम लाख प्रयास करें बिना किसी साधन के वर्तमान में रहने का आप सफल नहीं हो पाएंगे आपको सफलता कब मिलेगी जब उपाय नंबर 1 जो आपको बताया है कि सुबह शाम 30, 30 मिनट आपको अपनी सांसो पर कार्य करना है जब आप इस पर लगातार कार्य करते रहने के बाद में आप वास्तव में वर्तमान में रहने की कला को सीख जाएंगे।

और जो मनुष्य वर्तमान में रहने की कला को सीख जाता है वह अपनी उन्नति दूसरे मनुष्यों से अत्यधिक मात्रा में कर जाता है क्योंकि वर्तमान में वह अपना भविष्य ही बना रहा होता है वर्तमान में रहकर वह व्यक्ति ना तो भूतकाल के बारे में सोचता है और ना ही भविष्य के बारे में सोचता है बस वर्तमान में ही पुरुषार्थ किए जाता है। 

यदि आप खाना खा रहे हैं तो उस समय उस खाने के सवाद को ही महसूस कीजिये , यदि आप पानी पि रहे हैं तो उस पानी को गले से निचे उतरते हुए महसूस कीजिये , यदि आप नहा रहे हैं तो पानी को शरीर पर अच्छे से महसूस कीजिये इन उपायों से आपको काफी लाभ होगा 

4, स्वीकार करना सीखो

आपके जीवन में बहुत सी घटनाएँ घटती हैं जिन्हें आप स्वीकार ही नहीं करना चाहते हैं यदि आप स्वीकार करना सीख जाएं तो बहुत सारे चिंता और तनाव आपके जीवन से निकलकर बाहर हो जाएंगे। 

आप को यह सोचना चाहिए कि उस घटना से आपको बहुत कुछ सीखने को मिला है आपकी उन्नति हुई है आप नीचे नहीं गिरे हैं। 

उसे स्वीकार करके आपको आगे बढ़ जाना चाहिए

5, दूसरों के बारे में और खुद के बारे में सोचना बंद करो 

हमेशा दूसरों के बारे में यही सोचते रहते हैं फलाना व्यक्ति कितना अच्छा है वह फलाना व्यक्ति कितना बुरा है या फिर इसी प्रकार की बातें फिर आप अपने से तुलना करते हो मैं ऐसा हूं मैं वैसा हूं मैं उसके जैसा क्यों नहीं हूं। 

इसी प्रकार के विचारों में ज्यादातर व्यक्ति लगे रहते हैं यदि आप इन सब को छोड़कर इन विचारों को छोड़कर केवल वर्तमान में अपने ऊपर कार्य करते रहे तो आप ओवरथिंकिंग से बच सकते हैं।

ज्यादा सोचने के नुकसान ? (jyada sochne ke nuksan)

आइए अब जानते हैं ज्यादा सोचने के नुकसान क्या हैं?

  1. शरीर में कमजोरी लगना
  2. नींद ठीक से नहीं आना
  3. सर में भारीपन बना रहना
  4. याददाश्त की कमी होजाना
  5. रोगप्रतिरोधक शमता का कम होजाना
  6. खून की शुद्धता में कमी होना
  7. नसों में कमजोरी का होना

Q&A

मैं हर समय क्यों सोच रहा हूँ?

क्योकि आपका मन आपके वश में नहीं है इसीलिए आप हर समय सोचते रहते हैं।

क्या हर समय सोचना सामान्य है?

नहीं ये संन्य नहीं है आप हर समय सोचते रहते हैं इससे ये पता चलता है की आप मन के दास हैं आपको अपने मन का स्वामी कैसे बनना है उपर लेख में बताया जाचुका है।

दिमाग से नेगेटिविटी कैसे निकाले?

यदि आप सुबह शाम 30 , 30 मिनट ध्यान का अभ्यास करें और पुरे दिन भी उसी जागरूकता को बना कर रखें तो दिमाग से नेगेटिविटी आसानी से निकल जाएगी।

अब सबसे महत्वपूर्ण बात

सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि आप को अपने जीवन में ध्यान को जोड़ना है ध्यान पर मैंने अनेकों वीडियो बना रखी है और लेख भी लिख रखे हैं ध्यान के विषय में पूरी जानकारी के लिए निचे देखिये।

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योग क्या है? योग की परिभाषा क्या है?

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